Trade War Between USA-China: What is Benefits For India in Hindi

दुनिया के दो बड़े ताकतवर देश अमेरिका और चीन के बीच शुक्रवार से ट्रेड वॉर की शुरुआत हो रही है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अरबों अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा की चीनी वस्तुओं पर भारी-भरकम शुल्क लगाने का फैसला लिया थामाना जा रहा है कि ट्रंप के इस फैसले से चीन से अमेरिका आने वाली वस्तुएं 25 फीसदी महंगी हो जाएंगी.




वहीं, चीन ने डॉलर का बदला डॉलर से लेने का इरादा जाहिर करते हुए अमेरिकी निर्यात पर ‘तत्काल’ शुल्क लगा दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस टकराव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में खलबली पैदा हो जाएगी और विश्व व्यापार प्रणाली पर इसका काफी नकारात्मक असर पड़ेगा.

उद्योग जगत में असहजता के नए संकेत उस वक्त देखने को मिले जब एक व्यापार सर्वेक्षण में फिर दिखाया गया कि अमेरिका के सेवा क्षेत्र में पहले से ही आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी दिक्कतें पेश आ रही हैं और व्यापार बंदिशें बढ़ने की आशंका से लागत में इजाफा दर्ज किया जा रहा है.

आपूर्ति प्रबंधन संस्थान की सेवा उद्योग सर्वेक्षण समिति के प्रमुख एंथनी नाइव्स ने बताया कि हमने मुद्रास्फीति के संकेत देखने शुरू कर दिए हैं. व्हाइट हाउस के व्यापार अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती का मतलब है कि यदि यह युद्ध ज्यादा बढ़ता है तो ऐसी स्थिति में अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ज्यादा दर्द सह पाने में सक्षम है.

Impect on India

अमेरिका का यह कदम विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था द्वारा भारत सहित कई देशों के लिए स्टील और ऐल्युमिनियम पर टैरिफ लगाए जाने के बाद उठाया गया है। जापान, जर्मनी या कोरिया…सभी मुख्य ट्रेड पार्टनर के साथ 2017 में अमेरिका ने व्यापार घाटा झेला। अमेरिका के कुल व्यापार में 16.4 फीसदी हिस्से के साथ चीन उसका सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। व्यापार घाटा तब होता है जब किसी देश को निर्यात होने वाली वस्तुओं का मूल्य उस देश से आयात होने वाले वस्तुओं के मूल्य से कम होता है।




भारत अमेरिका के टॉप 5 ट्रेडिंग पार्टनर्स में नहीं आता है। 1.9 फीसदी की व्यापार हिस्सेदारी के साथ वह इस मामले में नौवें पायदान पर है। चीन-अमेरिका के कारोबारी रिश्तों में पलड़ा चीन की तरफ झुका हुआ है और अंतर करीब 375 अरब डॉलर का है। अमेरिका चीन में 130.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है तो चीन से 505.60 अरब डॉलर का आयात करता है। अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस 22.9 अरब डॉलर है, जो बहुत अधिक नहीं है।

इसके अतिरिक्त अमेरिका का व्यापार घाटा टेलिकम्युनिकेशन इक्विपमेंट, पैसेंजर कार वीइकल्स, कंप्यूटर्स, खिलौने, गेम्स, खेल के सामान और बिजली के उपकरणों जैसे सेक्टर में है और भारत इसमें बड़ा खिलाड़ी नहीं है।

डायमेंशंस कंसल्टिंग के सीर्इओ अजय श्रीवास्तव कहते हैं, ‘भारत ग्लोबल ट्रेड का छोटा हिस्सा है। मैं नहीं मानता कि कोई भी ट्रेड वॉर इसे नुकसान पहुंचा सकता है। यह कुछ सेक्टर्स को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन भारतीय निर्यातकों के लिए कोई भी बुरा समय नहीं देख रहा है।’

Source 

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